
ये तन्हाई
October 23, 2009 at 3:32 pm (Uncategorized)
चाँद तनहा है आसमां तनहा
दिल मिला है कहाँ कहाँ तनहा |
जिन्दगी क्या इसी को कहते हैं
जिस्म तनहा है औ जां तनहा |
हमसफ़र कोई मिला भी कहीं
दोनों चलते रहे तनहा तनहा |
राह देखा करेगा सदियों तक
छोड़ जायेंगे ये जहाँ तनहा |
बुझ गयी आग छुप गया तारा
थरथराता रहा धुआं तनहा |
बस यूँ ही….
September 10, 2009 at 2:21 pm (Uncategorized)
बन जोहरी
आशा का
एक दीप जलाया मैंने
जीवन की उठती गिरती
लहरों से
एक सीप उठाया मैंने
होगा मोती एक सच्चा
सुहाना सपना देखा मैंने
रखूँगा उसे संभाल
पल भर को सोचा मैंने
लहरों का एक रेला आया
छीन ले गया उसे समंदर
देखता ही रह गया बस
खो गया वो भीड़ के अन्दर …
ख्वाहिश
July 24, 2009 at 10:43 am (Uncategorized)
राज की बात तो ये है यारों हमे अपने ही राज का पता न था | हमारी आँखों मे भी था लहराता समंदर मगर दरिया को रास्ता मालूम न था | करते रहे व्यापार जिंदगी का उम्र भर साँसों का मगर कोई खरीदार न था | लब पर आती थी दुआ दोस्ती की यूँ तो दुश्मन हमारा ज़माना भी न था | आशियाँ ढूंढता रहा वो परिंदा रात भर कोई शजर यहाँ गुलज़ार न था | तन्हाइयों को सीने से लगा लेते मगर दिल इस कदर गम से बेजार न था | वादियों को पास बुला लेता मगर आहों मे वो असर ही न था |
fathers day…
June 20, 2009 at 11:20 am (Uncategorized)
जब जब जन्म दिया
पुत्र को माँ ने
एक अनोखी डोर बाँधी पिता ने
दुनिया मे नाम कराने का,
एक सफल मुकाम दिलाने का,
सपना पाल लिया
बिन कहे पिता ने ,
जब जब उंगली पकड़
आगे बढ़ने को
कदम बढ़वाए हैं
मेरा हाथ थामेगा एक दिन
कुछ ऐसे ख्वाब सजाए हैं ,
जब जब चोट खाई पुत्र ने
अनदेखी पीड़ा का दंश
झेला है पिता ने
घर के किसी कोने ने
देखा है हर वो आँसू
जो क्रोध वश हो
जिगर के टुकड़े को
मारने पर
पिता की आँखों ने बहाया है,
कैसे निर्मम हो सकती हैं
वो आँखें ,
जिन्होने दो नन्ही आँखों को
ख्वाब देखना सिखाया है ,
ये बात वो क्यू नही जानते
जो रंजिश की तलवार चलाते हैं ,
कैसे भूल जाता है उनका दिल
वो पल ,
वो लम्हे ,
जब काँटा बेटे को लगा था
और पाँव उनका सूज गया था …
rang
June 2, 2009 at 5:32 pm (Uncategorized)
जिंदगी से रंग चुरा कर ,
इन आँखों ने एक पंटिंग बनाई है …
केनवास पर बिखर गये हैं रंग
गुल्मोहर की सूरत मे,
इस पंटिंग मे
नारंगी फूलों से लदे,
गुल्मोहर पर बैठा है
एक ख्वाब,
जिसके साए बिखरे हैं दूर तलक,
ये ख्वाब करता है बातें
इन नारंगी फूलों से ,
ख्वाबों की ताबीर है कुछ ऐसी
दिखाते हैं ख्वाब फूलों को भी ,
थामे हाथ अपनो का
खो गये वो सपनो मे ,
जब तक पूरा ना हो ख्वाब ,
बसा रहता है ,
वहीं किसी कोने मे …..


