क्यूँ आँधियों को मेरा पता देते हो

सुलगते दिल को हवा देते हो
क्यूँ आँधियों को मेरा पता देते हो |
सीने में दफ़न कर दिया है यादों को
क्यूँ कब्र कि मिटटी कुरेदते हो |
शामों को उजला कर रही थी शमा
सुबह उठते ही सर कलम कर देते हो |
मिट मिट कर बनी है हस्ती हमारी
तुम हर बार एक जख्म नया देते हो |

sharad ritu

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ये तन्हाई

चाँद तनहा है आसमां तनहा
दिल मिला है कहाँ कहाँ तनहा |
जिन्दगी क्या इसी को कहते हैं
जिस्म तनहा है औ जां तनहा |
हमसफ़र कोई मिला भी कहीं
दोनों चलते रहे तनहा तनहा |
राह देखा करेगा सदियों तक
छोड़ जायेंगे ये जहाँ तनहा |
बुझ गयी आग छुप गया तारा
थरथराता रहा धुआं तनहा |

बस यूँ ही….

बन जोहरी
आशा का
एक दीप जलाया मैंने
जीवन की उठती गिरती
लहरों से
एक सीप उठाया मैंने
होगा मोती एक सच्चा
सुहाना सपना देखा मैंने
रखूँगा उसे संभाल
पल भर को सोचा मैंने
लहरों का एक रेला आया
छीन ले गया उसे समंदर
देखता ही रह गया बस
खो गया वो भीड़ के अन्दर …

zindagi k mayne

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Megha Barso

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ख्वाहिश

राज की बात तो ये है यारों
हमे अपने ही राज का पता न था |
हमारी आँखों मे भी था लहराता समंदर
मगर दरिया को रास्ता मालूम न था |
करते रहे व्यापार जिंदगी का उम्र भर
साँसों का  मगर कोई खरीदार न था |
लब पर आती थी दुआ दोस्ती की
यूँ तो दुश्मन हमारा ज़माना भी न था |
आशियाँ ढूंढता रहा वो परिंदा रात भर
कोई शजर यहाँ गुलज़ार न था |
तन्हाइयों को सीने से लगा लेते मगर
दिल इस कदर गम से बेजार न था |
वादियों को पास बुला लेता मगर
आहों मे वो असर ही न था |

thank god

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fathers day…

जब जब जन्म दिया
पुत्र को माँ ने
एक अनोखी डोर बाँधी पिता ने
दुनिया मे नाम कराने का,
एक सफल मुकाम दिलाने का,
सपना पाल लिया
बिन कहे पिता ने ,
जब जब उंगली पकड़
आगे बढ़ने को
कदम बढ़वाए हैं
मेरा हाथ थामेगा एक दिन
कुछ ऐसे ख्वाब सजाए हैं ,
जब जब चोट खाई पुत्र ने
अनदेखी पीड़ा का दंश
झेला है पिता ने
घर के किसी कोने ने
देखा है हर वो आँसू
जो क्रोध वश हो
जिगर के टुकड़े को
मारने पर
पिता की आँखों ने बहाया है,
कैसे निर्मम हो सकती हैं
वो आँखें ,
जिन्होने दो नन्ही आँखों को
ख्वाब देखना सिखाया है ,
ये बात वो क्यू नही जानते
जो रंजिश की तलवार चलाते हैं ,
कैसे भूल जाता है उनका दिल
वो पल ,
वो लम्हे ,
जब काँटा बेटे को लगा था
और पाँव उनका सूज गया था …

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